बैंकों की व्यवस्थाओं से परेशान ग्रामीणों एवं व्यापारियों ने सांसद मीणा से की कार्यवाही की मांग

पीएनबी की शाखा में पिछले 8 दिनों से कभी सर्वर बंद कभी विद्युत आपूर्ति बंद, कभी सिस्टम ठप होने के नाम पर लेनदेन बंद कर दिया जाता है ।

खेरवाड़ा, कस्बे के एसबीआई एवं पीएनबी शाखा में व्याप्त अव्यवस्थाओं से परेशान ग्रामीणों एवं व्यापारियों ने खेरवाड़ा के दौरे पर आए सांसद अर्जुन लाल मीणा को अपनी व्यथा बताई तथा बैंकों की कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार कराने की मांग की व्यापारियों एवं ग्रामीणों ने सांसद को बताया कि स्थानीय पीएनबी की शाखा में पिछले 8 दिनों से कभी सर्वर बंद कभी विद्युत आपूर्ति बंद, कभी सिस्टम ठप होने के नाम पर लेनदेन बंद कर दिया जाता है। शुक्रवार को तो कार्य दिवस होने के बावजूद पूरे दिन शाखा पर ताले लटके रहे, 31 मार्च को कार्य दिवस होने के बावजूद बैंक द्वारा बैंक बंद होने का बोर्ड लगाकर ताले लगा दिए गए, बैंक में जारी अव्यवस्थाओं से ग्रामीण व व्यापारी दिन भर चक्कर लगाते रहे लेकिन कोई उत्तर देने को तैयार नहीं है।

ताले लटके शाखा के बाहर

इसी प्रकार कस्बे के सबसे बड़ी एसबीआई बैंक की शाखा के हाल बहुत ज्यादा खराब है बैंक में पासबुक प्रिंटर आए दिन खराब रहता है वही सीडीएम मशीन भी अक्सर बीमार रहती है जिससे ग्राहकों को पासबुक प्रिंटिंग कराने के लिए महीनों चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है बैंक में ग्राहकों को स्टेटमेंट देने से मना कर दिया जाता है बैंक में आए दिन ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है बढ़ते साइबर अपराधों की जानकारी लेने के लिए ग्रामीण बैंक के चक्कर लगाते हैं लेकिन कोई जवाब नहीं दिया जाता है बैंक में छोटे लेनदेन के लिए तो ग्रामीणों को प्रवेश ही नहीं किया करने दिया जाता है उन्हें बैंक मित्र के पास जाने को मजबूर किया जाता है जहां नकदी जमा कराने हैं व  प्राप्त करने पर उन्हें मजबूरन शुल्क देना पड़ता है ग्रामीणों ने मीणा से बैंक कर्मचारियों के व्यवहार की भी शिकायत की तथा बताया कि उन्हें कोई जवाब संतोषप्रद उपलब्ध नहीं कराते हैं मीणा ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के पश्चात उच्चाधिकारियों को सारी स्थिति से अवगत कराया तथा उन्हें जमकर लताड़ लगाई मीणा ने कहा कि व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार किया जाना चाहिए। मीणा के साथ इस दौरे में व्यापार महासंघ के पूर्व अध्यक्ष पारस जैन, उपाध्यक्ष विमल कोठारी, अमित कलाल ,प्रमोद अग्रवाल एवं वरिष्ठ नेता बजरंग अग्रवाल आदि साथ थे।

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प्रधानमंत्री ने देश में परिवहन के इस मोड में समृद्ध इतिहास के बावजूद 2014 से पहले भारत में नदी जलमार्गों का कम इस्तेमाल होने के बारे में चर्चा की। 2014 के बाद, भारत इस प्राचीन शक्ति का उपयोग आधुनिक भारत के निर्माण के लिए कर रहा है। देश की बड़ी नदियों में जलमार्ग विकसित करने के लिए नया कानून और विस्तृत कार्ययोजना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में देश में केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे, अब देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं और लगभग दो दर्जन पहले से ही चालू हैं। इसी तरह, नदी जलमार्ग के माध्यम से कार्गो परिवहन में 8 साल पहले 30 लाख मीट्रिक टन से 3 गुना वृद्धि हुई है। पूर्वी भारत के विकास के विषय पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम पूर्वी भारत को विकसित भारत के लिए एक विकास इंजन बनाने में मदद करेंगे। यह हल्दिया मल्टीमॉडल टर्मिनल को वाराणसी से जोड़ता है और भारत बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और पूर्वोत्तर से भी जुड़ा हुआ है। यह कोलकाता बंदरगाह और बांग्लादेश को भी जोड़ता है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक व्यापार करने में आसानी होगी। कर्मचारियों और कुशल कार्यबल के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि गुवाहाटी में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित किया गया है और जहाजों की मरम्मत के लिए गुवाहाटी में एक नई सुविधा का निर्माण भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “क्रूज शिप हो या कार्गो शिप, ये न सिर्फ ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं, बल्कि इनकी सर्विस से जुड़ा पूरा उद्योग भी नए अवसर पैदा करता है।” एक अध्ययन का हवाला देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि जलमार्ग पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अच्छे हैं और पैसे की भी बचत करते हैं। उन्होंने कहा कि जलमार्गों के संचालन की लागत सड़क मार्गों की तुलना में ढाई गुना कम है और रेलवे की तुलना में एक तिहाई कम है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारत में हजारों किलोमीटर के जलमार्ग नेटवर्क को विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत में जो 125 से ज्यादा नदियां और नदी धाराएं हैं, वे लोगों और सामान के ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल की जा सकती हैं और ये वाटर-वे, भारत में पोर्ट लेड डेवलपमेंट को भी बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने जलमार्गों के एक आधुनिक बहु-मॉडल नेटवर्क के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया और बांग्लादेश और अन्य देशों के साथ साझेदारी के बारे में जानकारी दी, जिसने पूर्वोत्तर में जल संपर्क को मजबूत किया है। संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत में विकासशील जलमार्गों की निरंतर विकास प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा, 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