ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर सरकार गंभीर, पाठ्यक्रम में होगी 30 से 40 प्रतिशत कटौती

स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर सरकार ने नयी गाइड लाइन बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसकी जानकारी खुद पीसीसी चीफ व शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने दी। शिक्षा मंत्री डोटासरा ने कहा ऑनलाइन पढ़ाई की गाइड लाइन तैयार करने के साथ ही सरकार पाठ्यक्रम को भी 30 से 40 प्रतिशत कम करने की तैयारी कर रही है। प्रदेश में स्कूलों को खोलने को लेकर मंत्री डोटासरा ने कहा की केंद्र सरकार की गाइड लाइन का इंतजार किया जा रहा है। गाइडलाइन आने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चर्चा की जाएगी। इसके बाद प्रदेश के निजी और सरकारी स्कूल खोलने को लेकर नीति निर्धारित की जाएगी। तब तक स्कूल बच्चों के लिए बंद ही रहेंगे।

निजी स्कूलों की समस्या का होगा निवारण
मंत्री डोटासरा ने कहा की निजी स्कूल की समस्या को गंभीरता से लिया जायेगा साथ ही जो भी समस्या आ रही है, उनमे स्कूल संचालकों के साथ अभिभावक और विद्यार्थियों की समस्या को भी ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ग का ध्यान रखते हुए काम करेगी। वही मंत्री डोटासरा ने निजी स्कूलों की ऑनलाइन पढ़ाई को सही ठहरता हुए कहा की अब सरकार भी ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर गाइड लाइन तैयार कर रही है।

स्कूलों को मिलेगी नए शिक्षकों की सौगात
बेरोजगार अभियर्थियों द्वारा द्वितीय श्रेणी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए लंबे समय से मांग उठायी जा रही है। इसको लेकर मंत्री डोटासरा ने बेरोजगारों को आश्वासन देते हुए कहा की सितंबर महीने में करीब 9000 अभ्यर्थी सरकारी स्कूलों में नियुक्त कर दिए जाएंग। इसको लेकर सरकार ने चयनित अभ्यर्थियों के लिए मंडल आवंटन की कवायद भी शुरू कर दी

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प्रधानमंत्री ने देश में परिवहन के इस मोड में समृद्ध इतिहास के बावजूद 2014 से पहले भारत में नदी जलमार्गों का कम इस्तेमाल होने के बारे में चर्चा की। 2014 के बाद, भारत इस प्राचीन शक्ति का उपयोग आधुनिक भारत के निर्माण के लिए कर रहा है। देश की बड़ी नदियों में जलमार्ग विकसित करने के लिए नया कानून और विस्तृत कार्ययोजना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में देश में केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे, अब देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं और लगभग दो दर्जन पहले से ही चालू हैं। इसी तरह, नदी जलमार्ग के माध्यम से कार्गो परिवहन में 8 साल पहले 30 लाख मीट्रिक टन से 3 गुना वृद्धि हुई है। पूर्वी भारत के विकास के विषय पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम पूर्वी भारत को विकसित भारत के लिए एक विकास इंजन बनाने में मदद करेंगे। यह हल्दिया मल्टीमॉडल टर्मिनल को वाराणसी से जोड़ता है और भारत बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और पूर्वोत्तर से भी जुड़ा हुआ है। यह कोलकाता बंदरगाह और बांग्लादेश को भी जोड़ता है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक व्यापार करने में आसानी होगी। कर्मचारियों और कुशल कार्यबल के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि गुवाहाटी में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित किया गया है और जहाजों की मरम्मत के लिए गुवाहाटी में एक नई सुविधा का निर्माण भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “क्रूज शिप हो या कार्गो शिप, ये न सिर्फ ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं, बल्कि इनकी सर्विस से जुड़ा पूरा उद्योग भी नए अवसर पैदा करता है।” एक अध्ययन का हवाला देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि जलमार्ग पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अच्छे हैं और पैसे की भी बचत करते हैं। उन्होंने कहा कि जलमार्गों के संचालन की लागत सड़क मार्गों की तुलना में ढाई गुना कम है और रेलवे की तुलना में एक तिहाई कम है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारत में हजारों किलोमीटर के जलमार्ग नेटवर्क को विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत में जो 125 से ज्यादा नदियां और नदी धाराएं हैं, वे लोगों और सामान के ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल की जा सकती हैं और ये वाटर-वे, भारत में पोर्ट लेड डेवलपमेंट को भी बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने जलमार्गों के एक आधुनिक बहु-मॉडल नेटवर्क के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया और बांग्लादेश और अन्य देशों के साथ साझेदारी के बारे में जानकारी दी, जिसने पूर्वोत्तर में जल संपर्क को मजबूत किया है। संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत में विकासशील जलमार्गों की निरंतर विकास प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा, 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