विश्वास स्वरूपम महज एक स्टेच्यू नहीं, बल्कि एक अनुसंधान है – मुरारी बापू

नाथद्वारा, 01 नवम्बर।

श्रोताओं ने रचा इतिहास विश्वास स्वरुपम में डेढ़ लाख लोगों ने एक दिन में लिया भोजन प्रसाद।।
अभी तक 4.5 लाख से अधिक लोग ले चुके प्रभु प्रसाद भोजन।

‘‘भवानी शंकरौ वन्दे, श्रद्धा विश्वास रुपिणौ, याभ्यां बिना न पश्यन्ति, सिद्धाः स्वन्तस्थमीश्वरं।

वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकर रूपिणं, यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वंद्यते।।’’

विश्वास स्वरूपम महज एक स्टेच्यू नहीं, बल्कि एक अनुसंधान है। इसका अनुसंधान करने से जीव का अनुसंधान हो जाएगा। और अनुसंधान का मूल आधार विश्वास है।

शीतल संत मुरारी बापू ने यहां नाथद्वारा में विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा विश्वास स्वरूपम के विश्वार्पण के साथ शुरू हुई रामकथा के चौथे दिन मंगलवार को यह बात कही। उन्होंने विश्वास स्वरूपम को विस्तारित करते हुए कहा कि विश्वास स्वरूपम का दायां चरण परम पद है जो भरोसा देता है। बुद्ध पुरुष के पास बैठना अपने आप में अन्तर्यात्रा को प्रारंभ कर देता है। बायां चरण चरम पद है। यह विश्राम मुद्रा में थोड़ा ऊपर उठा हुआ है। वाम भाग हृदय होता है। महादेव का बायां हाथ अभय का संकेत करता है और दायां हाथ वरद है। गले में जो सर्प है वह मृत्यु का भय दूर करता है। हाथ में जो त्रिशूल है वह शस्त्र नहीं शास्त्र है जो तीनों लोक के तीनों ताप को मिटाता है। शिव की दाहिनी आंख सत्य है, बायीं आंख करुणा है और तीसरी आंख प्रेम है।

बापू ने भक्तिमती मीरा का पद ‘‘मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा ना कोई’’ सुनाते हुए प्रेम की गहराई की व्याख्या की। बापू ने कहा कि प्रेम निगरानी नहीं, बल्कि चिन्ता रखता है। प्रेम के मूल में भी विश्वास है। श्रीकृष्ण की भक्ति में भी प्रेम छिपा है। प्रेम सर्वस्व अर्पण की भावना है, कुछ पाने की आकांक्षा जहां होती है वहां प्रेम नहीं होता। बापू ने कहा कि यह सुअवसर है कि यहां श्रीनाथजी और विश्वास स्वरूप की महफिल सजी है। जहां प्रेम है वहीं विश्वास है। प्रेम और विश्वास दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।

विश्वास स्वरूपम महज एक स्टेच्यू नहीं, बल्कि एक अनुसंधान है। इसका अनुसंधान करने से जीव का अनुसंधान हो जाएगा। और अनुसंधान का मूल आधार विश्वास है।

शीतल संत मुरारी बापू ने यहां नाथद्वारा में विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा विश्वास स्वरूपम के विश्वार्पण के साथ शुरू हुई रामकथा के चौथे दिन मंगलवार को यह बात कही। उन्होंने विश्वास स्वरूपम को विस्तारित करते हुए कहा कि विश्वास स्वरूपम का दायां चरण परम पद है जो भरोसा देता है। बुद्ध पुरुष के पास बैठना अपने आप में अन्तर्यात्रा को प्रारंभ कर देता है। बायां चरण चरम पद है। यह विश्राम मुद्रा में थोड़ा ऊपर उठा हुआ है। वाम भाग हृदय होता है। महादेव का बायां हाथ अभय का संकेत करता है और दायां हाथ वरद है। गले में जो सर्प है वह मृत्यु का भय दूर करता है। हाथ में जो त्रिशूल है वह शस्त्र नहीं शास्त्र है जो तीनों लोक के तीनों ताप को मिटाता है। शिव की दाहिनी आंख सत्य है, बायीं आंख करुणा है और तीसरी आंख प्रेम है।

बापू ने भक्तिमती मीरा का पद ‘‘मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा ना कोई’’ सुनाते हुए प्रेम की गहराई की व्याख्या की। बापू ने कहा कि प्रेम निगरानी नहीं, बल्कि चिन्ता रखता है। प्रेम के मूल में भी विश्वास है। श्रीकृष्ण की भक्ति में भी प्रेम छिपा है। प्रेम सर्वस्व अर्पण की भावना है, कुछ पाने की आकांक्षा जहां होती है वहां प्रेम नहीं होता। बापू ने कहा कि यह सुअवसर है कि यहां श्रीनाथजी और विश्वास स्वरूप की महफिल सजी है। जहां प्रेम है वहीं विश्वास है। प्रेम और विश्वास दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।

‘‘काक चेष्टा, बको ध्यानं’’ श्लोक को उद्धृत करते हुए बापू ने समझाया कि यहां बगुले की तरह ध्यान की बात कही गई किन्तु यह भी समझना चाहिए कि वह ध्यान किसके लिए लगा रहा है। वह ध्यान मछली पकड़ने के लिए लगा रहा है, मछली को फांसना उसकी प्रवृत्ति है, किन्तु हमारा ध्यान हमारे सद्लक्ष्य की ओर होना चाहिए। बापू ने प्रलोभनी सलाह से बचने का मंत्र देते हुए कहा कि सुमंत्र और कुमंत्र दोनों होते हैं। मंत्र का अर्थ विचार से होता है। जहां सुमंत्र हो, अच्छा विचार हो उसकी ही सलाह लेनी चाहिए। कुमंत्री एवं प्रलोभनी सलाह से हमें हमेशा बचना चाहिए। कुमंत्र से हम पथभ्रमित हो सकते हैं, हिंसक भी हो सकते हैं।

यात्रा हमेशा कठिन होती है

मुरारी बापू ने कहा कि मानव जीवन में अन्तर्यात्रा और बहिर्यात्रा दो प्रकार की यात्रा होती है। किसी भी बुद्ध पुरुष के पास बैठना एक अन्तर्यात्रा है। यह मन को निर्मलता प्रदान करती है।

मन के विष को समाप्त करती है कथा

व्यासपीठ से बापू ने कहा कि भाव के बिना हमें शांति मिल ही नहीं सकती है। जब मधुमक्खियां एकत्रित होती हैं तो मधु एकत्र होता है। जबकि, हम दो मनुष्य एकत्र होते हैं तो मन का विष पैदा करते हैं। मन के इसी विष को समाप्त करने के लिए कथा की आवश्यकता होती है। बापू ने कहा कि मन में शुद्धि का भाव है, इसलिए हम एकत्र हुए हैं और भाव के कारण ही हम शांत भी हैं।

साधु का मतलब विश्वास

उन्होंने बताया कि हर वस्तु शब्दकोश में नहीं होती है, बल्कि कोई कोई हृदय कोश में भी होती है। हृदय कोश में साधु का मतलब विश्वास होता है। साधु और विश्वास एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। विश्वास अवर्णनीय होता है और इसी तरह साधु का भी कोई वर्णन नहीं है। साधु वर्ण से परे है क्योंकि वह शिव समान है। मानस में कई जनों को साधु बोला गया है। सेतु बनाना साधु का लक्षण है। साधु समन्वय करता है। विश्वास के साथ समाज को जोड़ने का काम साधु करता है। जिसको एकांत प्रिय हो वह साधु होता है। मौन रहना साधु का लक्षण है। आंख से क्या देखना और क्या नहीं देखना चाहिए, उसका विवेक से सम्यक करना साधु का गुण है। साधु रसेन्द्रिय को विवेक के साथ नियंत्रित करता है। विश्वास में सहन बहुत करना पड़ता है। विश्वास भिखारी नहीं बल्कि भिक्षुक होता है। साधु सबकी सेवा करता है, लेकिन स्मरण केवल हरि का करता है। साधु प्रमादी नहीं होता है, बल्कि वह श्रम करता है, तपस्वी होता है।

भक्ति वर्धन करने के दो सूत्र

मुरारी बापू ने कहा कि भक्ति को वर्धन करने के दो सूत्र बताए गए हैं। पहला सूत्र है त्याग करो, सबके बीच रहो, ममता भी रखो, लेकिन ममता के धागे की रस्सी बनाकर ठाकुरजी के चरणों में ले जाओ। भक्ति वर्धन करने का दूसरा सूत्र श्रवण कीर्तन है। भजन करो, भजन सुनो, ईश स्मरण में मन को रमाओ।

मेलास्थल बन गई है श्रीनाथजी की समूची नगरी

श्रीनाथजी की समूची नगरी मानो मेला स्थल बन गई है। दिन उगते ही गणेश टेकरी की ओर हजारों कदम बढ़ते हैं। रात्रि को लौटते समय भी यही स्थिति होती है। हजारों की संख्या में लोगों की आवाजाही के कारण मार्ग के किनारे अस्थायी स्टाल्स की कतार भी लग गई हैं जहां कथा श्रवण को आने-जाने वाले श्रोता खरीदारी करते नजर आ रहे हैं। ऐसा दृश्य है मानो रोज दीपावली का उत्सव है।

कथा के दौरान आयोजक संत कृपा सनातन संस्थान के ट्रस्टी मदन पालीवाल, मंत्रराज पालीवाल, विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी, राजस्थान के पूर्व मंत्री यूनुस खान, रवीन्द्र जोशी, रूपेश व्यास, विकास पुरोहित, विष्णु दत्त, प्रकाश पुरोहित, जिला कलेक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।

आज से संध्या में सांस्कृतिक रंग भी

‘‘विश्वास् स्वरूपम’’ अनावरण एवं रामकथा महोत्सव में 2 नवम्बर से सुबह भक्ति के साथ कर शाम को सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिलेगी।

सांस्कृतिक सरिता में 2 नवम्बर शाम को गुजराती कॉमेडी नाटकों के किंग सिद्धार्थ रांडेरिया अपनी प्रस्तुति देंगे। सिद्धार्थ रांडेरिया अभिनेता के रूप में सबसे अधिक लाईव प्रदर्शन का रेकार्ड बना चुके हैं।

3 नवम्बर शाम को रॉक अंदाज में भक्ति गीतों का जादू बिखेरकर दर्शकों को झूमने पर विवश करने वाले बाबा हंसराज रघुवंशी अपनी प्रस्तुति से शिव भक्ति करेंगे। वर्ष 2019 में ‘‘मेरा भोला है भण्डारी’’ भजन ने रघुवंशी को बतौर गायक स्थापित किया। बाबा हंसराज ने गायन की अपनी अलग ही शैली विकसित की है।

4 नवम्बर शाम को देश के ख्यातनाम कवि कुमार विश्वास, बुद्धिप्रकाश, जानी बैरागी सहित अन्य ख्यातनाम कवि काव्याधारा से विश्वास स्वरूपम का अभिषेक करेंगे। 5 नवम्बर शाम को भारतीय पॉप रॉक गायक कैलाश खेर अपनी सुर लहरियां बिखेरेंगे।

‘‘काक चेष्टा, बको ध्यानं’’ श्लोक को उद्धृत करते हुए बापू ने समझाया कि यहां बगुले की तरह ध्यान की बात कही गई किन्तु यह भी समझना चाहिए कि वह ध्यान किसके लिए लगा रहा है। वह ध्यान मछली पकड़ने के लिए लगा रहा है, मछली को फांसना उसकी प्रवृत्ति है, किन्तु हमारा ध्यान हमारे सद्लक्ष्य की ओर होना चाहिए। बापू ने प्रलोभनी सलाह से बचने का मंत्र देते हुए कहा कि सुमंत्र और कुमंत्र दोनों होते हैं। मंत्र का अर्थ विचार से होता है। जहां सुमंत्र हो, अच्छा विचार हो उसकी ही सलाह लेनी चाहिए। कुमंत्री एवं प्रलोभनी सलाह से हमें हमेशा बचना चाहिए। कुमंत्र से हम पथभ्रमित हो सकते हैं, हिंसक भी हो सकते हैं।

यात्रा हमेशा कठिन होती है

मुरारी बापू ने कहा कि मानव जीवन में अन्तर्यात्रा और बहिर्यात्रा दो प्रकार की यात्रा होती है। किसी भी बुद्ध पुरुष के पास बैठना एक अन्तर्यात्रा है। यह मन को निर्मलता प्रदान करती है।

मन के विष को समाप्त करती है कथा

व्यासपीठ से बापू ने कहा कि भाव के बिना हमें शांति मिल ही नहीं सकती है। जब मधुमक्खियां एकत्रित होती हैं तो मधु एकत्र होता है। जबकि, हम दो मनुष्य एकत्र होते हैं तो मन का विष पैदा करते हैं। मन के इसी विष को समाप्त करने के लिए कथा की आवश्यकता होती है। बापू ने कहा कि मन में शुद्धि का भाव है, इसलिए हम एकत्र हुए हैं और भाव के कारण ही हम शांत भी हैं।

साधु का मतलब विश्वास

उन्होंने बताया कि हर वस्तु शब्दकोश में नहीं होती है, बल्कि कोई कोई हृदय कोश में भी होती है। हृदय कोश में साधु का मतलब विश्वास होता है। साधु और विश्वास एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। विश्वास अवर्णनीय होता है और इसी तरह साधु का भी कोई वर्णन नहीं है। साधु वर्ण से परे है क्योंकि वह शिव समान है। मानस में कई जनों को साधु बोला गया है। सेतु बनाना साधु का लक्षण है। साधु समन्वय करता है। विश्वास के साथ समाज को जोड़ने का काम साधु करता है। जिसको एकांत प्रिय हो वह साधु होता है। मौन रहना साधु का लक्षण है। आंख से क्या देखना और क्या नहीं देखना चाहिए, उसका विवेक से सम्यक करना साधु का गुण है। साधु रसेन्द्रिय को विवेक के साथ नियंत्रित करता है। विश्वास में सहन बहुत करना पड़ता है। विश्वास भिखारी नहीं बल्कि भिक्षुक होता है। साधु सबकी सेवा करता है, लेकिन स्मरण केवल हरि का करता है। साधु प्रमादी नहीं होता है, बल्कि वह श्रम करता है, तपस्वी होता है।

भक्ति वर्धन करने के दो सूत्र

मुरारी बापू ने कहा कि भक्ति को वर्धन करने के दो सूत्र बताए गए हैं। पहला सूत्र है त्याग करो, सबके बीच रहो, ममता भी रखो, लेकिन ममता के धागे की रस्सी बनाकर ठाकुरजी के चरणों में ले जाओ। भक्ति वर्धन करने का दूसरा सूत्र श्रवण कीर्तन है। भजन करो, भजन सुनो, ईश स्मरण में मन को रमाओ।

मेलास्थल बन गई है श्रीनाथजी की समूची नगरी

श्रीनाथजी की समूची नगरी मानो मेला स्थल बन गई है। दिन उगते ही गणेश टेकरी की ओर हजारों कदम बढ़ते हैं। रात्रि को लौटते समय भी यही स्थिति होती है। हजारों की संख्या में लोगों की आवाजाही के कारण मार्ग के किनारे अस्थायी स्टाल्स की कतार भी लग गई हैं जहां कथा श्रवण को आने-जाने वाले श्रोता खरीदारी करते नजर आ रहे हैं। ऐसा दृश्य है मानो रोज दीपावली का उत्सव है।

कथा के दौरान आयोजक संत कृपा सनातन संस्थान के ट्रस्टी मदन पालीवाल, मंत्रराज पालीवाल, विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी, राजस्थान के पूर्व मंत्री यूनुस खान, रवीन्द्र जोशी, रूपेश व्यास, विकास पुरोहित, विष्णु दत्त, प्रकाश पुरोहित, जिला कलेक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।

आज से संध्या में सांस्कृतिक रंग भी

‘‘विश्वास् स्वरूपम’’ अनावरण एवं रामकथा महोत्सव में 2 नवम्बर से सुबह भक्ति के साथ कर शाम को सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिलेगी।

सांस्कृतिक सरिता में 2 नवम्बर शाम को गुजराती कॉमेडी नाटकों के किंग सिद्धार्थ रांडेरिया अपनी प्रस्तुति देंगे। सिद्धार्थ रांडेरिया अभिनेता के रूप में सबसे अधिक लाईव प्रदर्शन का रेकार्ड बना चुके हैं।

3 नवम्बर शाम को रॉक अंदाज में भक्ति गीतों का जादू बिखेरकर दर्शकों को झूमने पर विवश करने वाले बाबा हंसराज रघुवंशी अपनी प्रस्तुति से शिव भक्ति करेंगे। वर्ष 2019 में ‘‘मेरा भोला है भण्डारी’’ भजन ने रघुवंशी को बतौर गायक स्थापित किया। बाबा हंसराज ने गायन की अपनी अलग ही शैली विकसित की है।

4 नवम्बर शाम को देश के ख्यातनाम कवि कुमार विश्वास, बुद्धिप्रकाश, जानी बैरागी सहित अन्य ख्यातनाम कवि काव्याधारा से विश्वास स्वरूपम का अभिषेक करेंगे। 5 नवम्बर शाम को भारतीय पॉप रॉक गायक कैलाश खेर अपनी सुर लहरियां बिखेरेंगे।

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सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने भगवान महादेव की जय-जयकार की और लोहड़ी के शुभ अवसर पर सभी को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने हमारे त्योहारों में दान, आस्था, तपस्या और आस्था तथा उनमें नदियों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा यह नदी जलमार्ग से संबंधित परियोजनाओं को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। उन्होंने कहा कि काशी से डिब्रूगढ़ तक के सबसे लंबे रिवर क्रूज को आज झंडी दिखाई जा रही है, जो विश्व पर्यटन मानचित्र पर उत्तर भारत के पर्यटन स्थलों को सामने लाएगा। उन्होंने कहा कि आज वाराणसी, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार, असम में समर्पित की जा रही एक हजार करोड़ रुपये की अन्य परियोजनाएं पूर्वी भारत में पर्यटन और रोजगार की संभावनाओं को बढ़ावा देंगी। प्रत्येक भारतीय के जीवन में गंगा नदी की केंद्रीय भूमिका के बारे में चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि गंगा जी हमारे लिए सिर्फ एक जलधारा भर नहीं है, बल्कि यह प्राचीन काल से हमारे महान भारत की तप-तपस्या की साक्षी हैं। उन्होंने कहा कि भारत की स्थितियां-परिस्थितियां कैसी भी रही हों, मां गंगे ने हमेशा कोटि-कोटि भारतीयों को पोषित किया है, प्रेरित किया है। श्री मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद की अवधि में गंगा किनारे के आस-पास का क्षेत्र विकास में पिछड़ गया, जिससे इस क्षेत्र से आबादी का भारी पलायन हुआ। प्रधानमंत्री ने इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए दोहरे दृष्टिकोण की व्याख्या की। एक ओर नमामि गंगे के माध्यम से गंगा की सफाई का अभियान चलाया गया तो दूसरी ओर अर्थ गंगा का सहारा लिया गया। ‘अर्थ गंगा’ में जिन राज्यों से गंगा गुजरती है, वहां आर्थिक गतिशीलता का वातावरण बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं। क्रूज की पहली यात्रा पर आए विदेशी पर्यटकों को सीधे संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “आज भारत के पास सब कुछ है और आपकी कल्पना से परे भी बहुत कुछ है।” उन्होंने कहा कि भारत को केवल दिल से अनुभव किया जा सकता है क्योंकि देश ने क्षेत्र या धर्म, पंथ या देश के बावजूद सभी का खुले दिल से स्वागत किया है और दुनिया के सभी हिस्सों से पर्यटकों का स्वागत किया है। रिवर क्रूज के अनुभव पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि इसमें सभी के लिए कुछ न कुछ खास है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता में रुचि रखने वालों के लिए काशी, बोधगया, विक्रमशिला, पटना साहिब और माजुली जैसे गंतव्यों को कवर किया जाएगा, एक बहुराष्ट्रीय क्रूज अनुभव की तलाश करने वाले पर्यटकों को बांग्लादेश में ढाका से होकर जाने का अवसर मिलेगा, और जो भारत की प्राकृतिक विविधता को देखना चाहते हैं, उनके लिए यह सुंदरबन और असम के जंगलों से होकर गुजरेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह क्रूज 25 विभिन्न नदी धाराओं से होकर गुजरेगा, इसलिए उन लोगों के लिए इस क्रूज का विशेष महत्व है, जो भारत की नदी प्रणालियों को समझने में गहरी रुचि रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह उन लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो भारत के असंख्य पाक और व्यंजनों का पता लगाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने क्रूज पर्यटन के नए युग पर प्रकाश डालते हुए कहा, “कोई भी इस क्रूज पर भारत की विरासत और इसकी आधुनिकता के असाधारण समामेलन को देख सकता है, जहां देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।” प्रधानमंत्री ने कहा, “विदेशी पर्यटकों के लिए तो यह आकर्षण होगा ही, देश के भी जो पर्यटक पहले ऐसे अनुभवों के लिए विदेश जाते थे, वे अब पूर्वी-उत्तर पूर्वी भारत का रुख कर पाएंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि बजट के साथ-साथ लग्जरी अनुभव को ध्यान में रखते हुए क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देश के अन्य अंतर्देशीय जलमार्गों में भी इसी तरह की सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत पर्यटन के एक मजबूत चरण में प्रवेश कर रहा है क्योंकि बढ़ते वैश्विक प्रोफाइल के साथ, भारत के बारे में उत्सुकता भी बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसीलिए, पिछले 8 वर्षों में देश में पर्यटन क्षेत्र के विस्तार के लिए कई कदम उठाए गए हैं। आस्था के स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया गया और काशी ऐसे प्रयासों का जीता-जागता उदाहरण है। बेहतर सुविधाओं और काशी विश्वनाथ धाम के कायाकल्प के साथ, काशी में आने वाले भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी बढ़ावा मिला है। काशी में गंगा पार अद्भुत टेंट सिटी से वहां आने और रहने का एक और बड़ा कारण देश-दुनिया के पर्यटकों-श्रद्धालुओं को मिला है। आधुनिकता, आध्यात्मिकता और आस्था से ओतप्रोत न्यू टेंट सिटी पर्यटकों को एक नया अनुभव प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का कार्यक्रम देश में 2014 के बाद की नीतियों, निर्णयों और दिशा-निर्देशों का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री ने कहा, “21वीं सदी का यह दशक, भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर के कायाकल्प का दशक है। इस दशक में भारत के लोग, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की वह तस्वीर देखने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना तक मुश्किल थी।” उन्होंने कहा कि घरों, शौचालयों, अस्पतालों, बिजली, पानी, रसोई गैस, शैक्षिक संस्थानों जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचे से लेकर रेलवे, जलमार्ग, वायुमार्ग और सड़कों जैसे भौतिक संपर्क बुनियादी ढांचे तक, ये सभी भारत के तेजी से विकास के मजबूत संकेतक हैं। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में भारत सबसे अच्छा और सबसे बड़ा देख रहा है। प्रधानमंत्री ने देश में परिवहन के इस मोड में समृद्ध इतिहास के बावजूद 2014 से पहले भारत में नदी जलमार्गों का कम इस्तेमाल होने के बारे में चर्चा की। 2014 के बाद, भारत इस प्राचीन शक्ति का उपयोग आधुनिक भारत के निर्माण के लिए कर रहा है। देश की बड़ी नदियों में जलमार्ग विकसित करने के लिए नया कानून और विस्तृत कार्ययोजना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में देश में केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे, अब देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं और लगभग दो दर्जन पहले से ही चालू हैं। इसी तरह, नदी जलमार्ग के माध्यम से कार्गो परिवहन में 8 साल पहले 30 लाख मीट्रिक टन से 3 गुना वृद्धि हुई है। पूर्वी भारत के विकास के विषय पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम पूर्वी भारत को विकसित भारत के लिए एक विकास इंजन बनाने में मदद करेंगे। यह हल्दिया मल्टीमॉडल टर्मिनल को वाराणसी से जोड़ता है और भारत बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और पूर्वोत्तर से भी जुड़ा हुआ है। यह कोलकाता बंदरगाह और बांग्लादेश को भी जोड़ता है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक व्यापार करने में आसानी होगी। कर्मचारियों और कुशल कार्यबल के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि गुवाहाटी में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित किया गया है और जहाजों की मरम्मत के लिए गुवाहाटी में एक नई सुविधा का निर्माण भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “क्रूज शिप हो या कार्गो शिप, ये न सिर्फ ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं, बल्कि इनकी सर्विस से जुड़ा पूरा उद्योग भी नए अवसर पैदा करता है।” एक अध्ययन का हवाला देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि जलमार्ग पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अच्छे हैं और पैसे की भी बचत करते हैं। उन्होंने कहा कि जलमार्गों के संचालन की लागत सड़क मार्गों की तुलना में ढाई गुना कम है और रेलवे की तुलना में एक तिहाई कम है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारत में हजारों किलोमीटर के जलमार्ग नेटवर्क को विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत में जो 125 से ज्यादा नदियां और नदी धाराएं हैं, वे लोगों और सामान के ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल की जा सकती हैं और ये वाटर-वे, भारत में पोर्ट लेड डेवलपमेंट को भी बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने जलमार्गों के एक आधुनिक बहु-मॉडल नेटवर्क के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया और बांग्लादेश और अन्य देशों के साथ साझेदारी के बारे में जानकारी दी, जिसने पूर्वोत्तर में जल संपर्क को मजबूत किया है। संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत में विकासशील जलमार्गों की निरंतर विकास प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा, “एक विकसित भारत के निर्माण के लिए मजबूत कनेक्टिविटी आवश्यक है।” प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की नदी जल शक्ति और देश के व्यापार और पर्यटन को नई ऊंचाई देगी और उन्होंने सभी क्रूज यात्रियों के लिए सुखद यात्रा की कामना की।…
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श्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश और बिहार में भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से कई लोगों के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया
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