श्री पीयूष गोयल ने भारत- अमेरिका व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का आह्वान किया

श्री गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ प्रारंभिक सीमित व्यापार पैकेज पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है भारत
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी व्यापार एवं उद्योग जगत को अपने भारतीय समकक्षों के साथ काम करने के लिए आमंत्रित किया है ताकि द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके। श्री गोयल ने आज एक वर्चुअल सम्मेलन के जरिये यूएस- इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देश सरकार, व्यापार और लोगों से लोगों के स्तर पर एक दूसरे के साथ गहरी प्रतिबद्धता साझा करते हैं। दोनों देश स्वतंत्र एवं निष्पक्ष व्यापार में विश्वास करते हैं और अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। उन्होंने कहा कि व्यापार से इतर पारस्‍परिक रूप से संबद्ध इस दुनिया में दोनों देश वैश्विक मूल्य श्रृंखला में विश्वसनीय एवं भरोसेमंद साझेदार हो सकते है

श्री गोयल ने यूएसआईएसपीएफ के सदस्यों को देश में उद्योग एवं निवेश को सुगम बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जीआईएस सम‍र्थ भूमि बैंक को पायलट आधार पर छह राज्यों के साथ लॉन्च किया गया है जो निवेशकों को भूमि एवं स्थान की पहचान करने में मदद करेगा। मंत्री ने मंजूरी के लिए एकल खिड़की प्रणाली के बारे में भी बताया जिसे केंद्र, राज्य और नगरपालिका के स्‍तर पर विभिन्न अनुमोदन अधिकारियों और एजेंसियों के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते के मुद्दे पर श्री गोयल ने कहा कि भारत प्रारंभिक सीमित व्यापार पैकेज पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है और अब अमेरिका को इस ओर आगे बढ़ना चाहिए।

श्री गोयल ने कहा कि आगे की राह में चुनौतियों से भरी हो सकती है लेकिन उसमें तमाम अवसर भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि वै‍श्विक महामारी के कारण देश में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई थी लेकिन उसमें तेजी से सुधार के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय रेलवे द्वारा माल ढुलाई की मात्रा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि 2019 की इसी अवधि की तुलना में अगस्त 2020 में यह 4 प्रतिशत अधिक रही। इसी प्रकार, जुलाई 2019 की तुलना में जुलाई 2020 में निर्यात 88 प्रतिशत तक पहुंच चुका था। उन्‍होंने कहा कि आगे इसमें और तेजी आई है और अगस्त के आंकड़े, जिन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है, कहीं बेहतर दिख रहे हैं। यदि कुल निर्यातसे तेल और रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के आंकड़े को अलग कर दिया जाए तो वृद्धि कहीं अधिक दिखेगी।

मंत्री ने कहा कि कोविड के प्रसार की रोकथाम के लिए भारत द्वारा उठाए गए शुरुआती और मजबूत कदमों ने देश को अच्छी स्थिति में खड़ा कर दिया है क्योंकि मृत्‍यु दर कम है। यही कारण है कि भारत में मृत्‍यु दर महज 2 प्रतिशत और रिकवरी दर 75 प्रतिशत से ऊपर है। मंत्री ने कहा कि बड़ी आबादी के बावजूद भारत के लोगों ने समय के साथ ढलने की काफी क्षमता दिखाई है। उन्होंने कहा कि देश में लॉकडाउन की अवधि का उपयोग स्वास्थ्य सेवा ढांचे को मजबूत करने के लिए किया गया था और प्रोत्साहन एवं राहत पैकेज ने लोगों को इस वैश्विक महामारी से लड़ने में मदद की है। प्रधानमंत्री की भूमिका और नेतृत्व की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि श्री नरेन्‍द्र मोदी अपनी योजना में हमेशा दो कदम आगे रहते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत कोविड के खिलाफ जंग में विजयी होगा, समय के नुकसान की भरपाई करने में समर्थ होगा और अगले 5 वर्षों में 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लख्‍य को प्राप्त करने के लिए पटरी पर लौट आएगा और भारत के 1.3 अरब लोगों के लिए समृद्धि लाएगा।

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प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत पर्यटन के एक मजबूत चरण में प्रवेश कर रहा है क्योंकि बढ़ते वैश्विक प्रोफाइल के साथ, भारत के बारे में उत्सुकता भी बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसीलिए, पिछले 8 वर्षों में देश में पर्यटन क्षेत्र के विस्तार के लिए कई कदम उठाए गए हैं। आस्था के स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया गया और काशी ऐसे प्रयासों का जीता-जागता उदाहरण है। बेहतर सुविधाओं और काशी विश्वनाथ धाम के कायाकल्प के साथ, काशी में आने वाले भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी बढ़ावा मिला है। काशी में गंगा पार अद्भुत टेंट सिटी से वहां आने और रहने का एक और बड़ा कारण देश-दुनिया के पर्यटकों-श्रद्धालुओं को मिला है। आधुनिकता, आध्यात्मिकता और आस्था से ओतप्रोत न्यू टेंट सिटी पर्यटकों को एक नया अनुभव प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का कार्यक्रम देश में 2014 के बाद की नीतियों, निर्णयों और दिशा-निर्देशों का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री ने कहा, “21वीं सदी का यह दशक, भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर के कायाकल्प का दशक है। इस दशक में भारत के लोग, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की वह तस्वीर देखने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना तक मुश्किल थी।” उन्होंने कहा कि घरों, शौचालयों, अस्पतालों, बिजली, पानी, रसोई गैस, शैक्षिक संस्थानों जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचे से लेकर रेलवे, जलमार्ग, वायुमार्ग और सड़कों जैसे भौतिक संपर्क बुनियादी ढांचे तक, ये सभी भारत के तेजी से विकास के मजबूत संकेतक हैं। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में भारत सबसे अच्छा और सबसे बड़ा देख रहा है। प्रधानमंत्री ने देश में परिवहन के इस मोड में समृद्ध इतिहास के बावजूद 2014 से पहले भारत में नदी जलमार्गों का कम इस्तेमाल होने के बारे में चर्चा की। 2014 के बाद, भारत इस प्राचीन शक्ति का उपयोग आधुनिक भारत के निर्माण के लिए कर रहा है। देश की बड़ी नदियों में जलमार्ग विकसित करने के लिए नया कानून और विस्तृत कार्ययोजना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में देश में केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे, अब देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं और लगभग दो दर्जन पहले से ही चालू हैं। इसी तरह, नदी जलमार्ग के माध्यम से कार्गो परिवहन में 8 साल पहले 30 लाख मीट्रिक टन से 3 गुना वृद्धि हुई है। पूर्वी भारत के विकास के विषय पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम पूर्वी भारत को विकसित भारत के लिए एक विकास इंजन बनाने में मदद करेंगे। यह हल्दिया मल्टीमॉडल टर्मिनल को वाराणसी से जोड़ता है और भारत बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और पूर्वोत्तर से भी जुड़ा हुआ है। यह कोलकाता बंदरगाह और बांग्लादेश को भी जोड़ता है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक व्यापार करने में आसानी होगी। कर्मचारियों और कुशल कार्यबल के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि गुवाहाटी में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित किया गया है और जहाजों की मरम्मत के लिए गुवाहाटी में एक नई सुविधा का निर्माण भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “क्रूज शिप हो या कार्गो शिप, ये न सिर्फ ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं, बल्कि इनकी सर्विस से जुड़ा पूरा उद्योग भी नए अवसर पैदा करता है।” एक अध्ययन का हवाला देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि जलमार्ग पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अच्छे हैं और पैसे की भी बचत करते हैं। उन्होंने कहा कि जलमार्गों के संचालन की लागत सड़क मार्गों की तुलना में ढाई गुना कम है और रेलवे की तुलना में एक तिहाई कम है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारत में हजारों किलोमीटर के जलमार्ग नेटवर्क को विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत में जो 125 से ज्यादा नदियां और नदी धाराएं हैं, वे लोगों और सामान के ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल की जा सकती हैं और ये वाटर-वे, भारत में पोर्ट लेड डेवलपमेंट को भी बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने जलमार्गों के एक आधुनिक बहु-मॉडल नेटवर्क के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया और बांग्लादेश और अन्य देशों के साथ साझेदारी के बारे में जानकारी दी, जिसने पूर्वोत्तर में जल संपर्क को मजबूत किया है। संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत में विकासशील जलमार्गों की निरंतर विकास प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा, “एक विकसित भारत के निर्माण के लिए मजबूत कनेक्टिविटी आवश्यक है।” प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की नदी जल शक्ति और देश के व्यापार और पर्यटन को नई ऊंचाई देगी और उन्होंने सभी क्रूज यात्रियों के लिए सुखद यात्रा की कामना की।…
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