निजी अस्पतालों को कुल क्षमता के 30 प्रतिशत बैड कोरोना संक्रमितों के लिए रिजर्व रखने होंगे – चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री

जयपुर 25 सितंबर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर व बीकानेर जिला मुख्यालयों पर सेवारत निजी चिकित्सालयों को अपनी बैड क्षमता के 30 प्रतिशत बैड कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए रिजर्व रखने के निर्देश दिए हैं।
PRIVATE HOSPITALS HAVE TO KEEP 30% BEDS OF ITS TOTAL CAPACITY RESERVED FOR CORONA PATIENTS – HEALTH MINISTER

जयपुर 25 सितंबर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर व बीकानेर जिला मुख्यालयों पर सेवारत निजी चिकित्सालयों को अपनी बैड क्षमता के 30 प्रतिशत बैड कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए रिजर्व रखने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रदेश में कार्यरत सरकारी व निजी चिकित्सालयों की भूमिका कोरोनाकाल में सराहनीय रही है लेकिन अभी भी कुछ ऎसे बड़े निजी चिकित्सालय हैं, जो कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार नहीं कर रहे है। उन्होंने कहा कि जयपुर, जोधपुर, कोटा व उदयपुर जिला मुख्यालय पर सेवारत 80 या अधिक बैड क्षमता के निजी चिकित्सालयो को 30 प्रतिशत बैड कोरोना संक्रमितों के लिए रिजर्व रखने होंगे। उन्होेंने कहा कि अजमेर व बीकानेर जिला मुख्यालय में मौजूद 60 से अधिक बैड क्षमता के निजी चिकित्सालयो को भी 30 प्रतिशत बैड कोरोना मरीजों के लिए रखना अनिवार्य होगा।
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि ऎसे सभी निजी चिकित्सालय कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अस्पताल परिसर में ही अलग वार्ड में करना होगा। संक्रमित मरीजों का उपचार विभाग की 3 सितंबर 2020 की अधिसूचना की दरों के अनुसार किया जाएगा।
इस संदर्भ में चिकित्सा विभाग के प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोरा ने राजस्थान महामारी अध्यादेश का प्रयोग करते हुए शुक्रवार को निजी चिकित्सालयों के लिए निर्देश जारी किए हैं।

PRIVATE HOSPITALS HAVE TO KEEP 30% BEDS OF ITS TOTAL CAPACITY RESERVED FOR CORONA PATIENTS – HEALTH MINISTER

Jaipur, September 25. Health Minister Dr. Raghu Sharma has directed in-service private hospitals at Jaipur, Jodhpur, Kota, Udaipur, Ajmer, and Bikaner district headquarters to keep 30% beds reserved out of their total bed capacity for corona infected patients.
Dr Sharma said that the role of government and private hospitals in the State during the corona period was praiseworthy but still there are few big private hospitals who are not treating the corona infected patients. He said that private hospitals with beds capacity of 80 beds or more in Jaipur, Jodhpur, Kota, and Udaipur district headquarters will have to keep 30% of their beds reserved for corona infected patients. He said that it will be compulsory for the private hospitals with a capacity of 60 beds or more in Ajmer and Bikaner district headquarters will also have to keep 30% beds for corona patients.
The Health Minister said that all such private hospitals following COVID-19 protocol will have to treat corona infected patients in a separate ward within the hospital premises. The treatment of corona infected patients will be done as per the rates of the department’s notification dated September 3, 2020.
The Health Department principal secretary Shri Akhil Arora using the Rajasthan Epidemic Ordinance has issued directions to private hospitals on Friday.

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“विदेशी पर्यटकों के लिए तो यह आकर्षण होगा ही, देश के भी जो पर्यटक पहले ऐसे अनुभवों के लिए विदेश जाते थे, वे अब पूर्वी-उत्तर पूर्वी भारत का रुख कर पाएंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि बजट के साथ-साथ लग्जरी अनुभव को ध्यान में रखते हुए क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देश के अन्य अंतर्देशीय जलमार्गों में भी इसी तरह की सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत पर्यटन के एक मजबूत चरण में प्रवेश कर रहा है क्योंकि बढ़ते वैश्विक प्रोफाइल के साथ, भारत के बारे में उत्सुकता भी बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसीलिए, पिछले 8 वर्षों में देश में पर्यटन क्षेत्र के विस्तार के लिए कई कदम उठाए गए हैं। आस्था के स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया गया और काशी ऐसे प्रयासों का जीता-जागता उदाहरण है। बेहतर सुविधाओं और काशी विश्वनाथ धाम के कायाकल्प के साथ, काशी में आने वाले भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी बढ़ावा मिला है। काशी में गंगा पार अद्भुत टेंट सिटी से वहां आने और रहने का एक और बड़ा कारण देश-दुनिया के पर्यटकों-श्रद्धालुओं को मिला है। आधुनिकता, आध्यात्मिकता और आस्था से ओतप्रोत न्यू टेंट सिटी पर्यटकों को एक नया अनुभव प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का कार्यक्रम देश में 2014 के बाद की नीतियों, निर्णयों और दिशा-निर्देशों का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री ने कहा, “21वीं सदी का यह दशक, भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर के कायाकल्प का दशक है। इस दशक में भारत के लोग, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की वह तस्वीर देखने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना तक मुश्किल थी।” उन्होंने कहा कि घरों, शौचालयों, अस्पतालों, बिजली, पानी, रसोई गैस, शैक्षिक संस्थानों जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचे से लेकर रेलवे, जलमार्ग, वायुमार्ग और सड़कों जैसे भौतिक संपर्क बुनियादी ढांचे तक, ये सभी भारत के तेजी से विकास के मजबूत संकेतक हैं। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में भारत सबसे अच्छा और सबसे बड़ा देख रहा है। प्रधानमंत्री ने देश में परिवहन के इस मोड में समृद्ध इतिहास के बावजूद 2014 से पहले भारत में नदी जलमार्गों का कम इस्तेमाल होने के बारे में चर्चा की। 2014 के बाद, भारत इस प्राचीन शक्ति का उपयोग आधुनिक भारत के निर्माण के लिए कर रहा है। देश की बड़ी नदियों में जलमार्ग विकसित करने के लिए नया कानून और विस्तृत कार्ययोजना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में देश में केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे, अब देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं और लगभग दो दर्जन पहले से ही चालू हैं। इसी तरह, नदी जलमार्ग के माध्यम से कार्गो परिवहन में 8 साल पहले 30 लाख मीट्रिक टन से 3 गुना वृद्धि हुई है। पूर्वी भारत के विकास के विषय पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम पूर्वी भारत को विकसित भारत के लिए एक विकास इंजन बनाने में मदद करेंगे। यह हल्दिया मल्टीमॉडल टर्मिनल को वाराणसी से जोड़ता है और भारत बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और पूर्वोत्तर से भी जुड़ा हुआ है। यह कोलकाता बंदरगाह और बांग्लादेश को भी जोड़ता है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक व्यापार करने में आसानी होगी। कर्मचारियों और कुशल कार्यबल के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि गुवाहाटी में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित किया गया है और जहाजों की मरम्मत के लिए गुवाहाटी में एक नई सुविधा का निर्माण भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “क्रूज शिप हो या कार्गो शिप, ये न सिर्फ ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं, बल्कि इनकी सर्विस से जुड़ा पूरा उद्योग भी नए अवसर पैदा करता है।” एक अध्ययन का हवाला देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि जलमार्ग पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अच्छे हैं और पैसे की भी बचत करते हैं। उन्होंने कहा कि जलमार्गों के संचालन की लागत सड़क मार्गों की तुलना में ढाई गुना कम है और रेलवे की तुलना में एक तिहाई कम है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारत में हजारों किलोमीटर के जलमार्ग नेटवर्क को विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत में जो 125 से ज्यादा नदियां और नदी धाराएं हैं, वे लोगों और सामान के ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल की जा सकती हैं और ये वाटर-वे, भारत में पोर्ट लेड डेवलपमेंट को भी बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने जलमार्गों के एक आधुनिक बहु-मॉडल नेटवर्क के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया और बांग्लादेश और अन्य देशों के साथ साझेदारी के बारे में जानकारी दी, जिसने पूर्वोत्तर में जल संपर्क को मजबूत किया है। संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत में विकासशील जलमार्गों की निरंतर विकास प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा, “एक विकसित भारत के निर्माण के लिए मजबूत कनेक्टिविटी आवश्यक है।” प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की नदी जल शक्ति और देश के व्यापार और पर्यटन को नई ऊंचाई देगी और उन्होंने सभी क्रूज यात्रियों के लिए सुखद यात्रा की कामना की।…
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