गुम या चोरी हुए मोबाइल की शिकायत दर्ज करना हुआ आसान, जानें पूरा प्रोसेस

अगर आपका मोबाइल चोरी या गुम हो गया है तो अब शिकायत दर्ज करना आसान हो गया है। दूरसंचार विभाग ने इसके लिए साल 2019 में सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी सिस्टम बनाया था, जो चोरी या गुम मोबाइल को हर नेटवर्क पर ब्लॉक करने के लिए है। शुरुआत में यह सुविधा सिर्फ दादरा-नगर हवेली, गोवा और महाराष्ट्र में ही उपलब्ध थी, लेकिन अब देशभर में उपलब्ध करा दी गई है।

दूरसंचार विभाग की सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्ट्री सेवा सभी मोबाइल ऑपरेटरों के आइएमइआइ डेटाबेस से जुड़ती है। सभी नेटवर्क ऑपरेटरों के लिए केंद्रीय प्रणाली के रूप में कार्य करती है, जिससे एक नेटवर्क पर ब्लॉक किए गए मोबाइल दूसरे नेटवर्क पर भी काम करने से रोकता है। ऐसे में ब्लैक लिस्ट किए गए मोबाइल डिवाइस का नम्बर शेयर किया जाता है।

ऐसे मदद करता है पोर्टल

  • मोबाइल चोरी होने पर सबसे पहले पुलिस रिपोर्ट या ऑनलाइन शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
  • मोबाइल के आइएमइआर नंबर को डिसएबल करने के लिए सीइआइआर वेबसाइट https://www.ceir.gov.in पर जाएं।
  • वेबसाइट के होम पेज पर ब्लॉक स्टोलन/लोस्ट मोबाइल का विकल्प दिखता है।
  • क्लिक करने पर रिक्वेस्ट फॉर ब्लॉकिंग लोस्ट/स्टोलन मोबाइल पेज खुलेगा।
  • मोबाइल नम्बर, गुमशुदगी जगह, तारीख, पता, नाम, आइडी प्रूफ आदि भरना है।
  • डिटेल के बाद ओटीपी लिखें, डिक्लेरेशन पर क्लिक करके सबमिट करें।

मोबाइल मिलने पर स्टेप

वेबसाइड पर डिटेल जानकारी दर्ज हो जाने पर रिक्वेस्ट आइडी आएगी, जिससे मोबाइल की निगरानी कर सकते हैं। जब मोबाइल पुन: मिल जाए तो ब्लॉक किए गए आइइएमआर नंबर को अनब्लॉक भी कर सकते हैं। इसके लिए सीइआरआर वेबसाइट पर जाना होगा। मुख्य पेज पर अन-ब्लॉक फाउंड मोबाइल पर क्लिक करेंगे। रिक्वेस्ट आइडी और मोबाइल नंबर दर्ज करें और सबमिट करने से नम्बर अनब्लॉक हो जाएगा।

एसएमएस से ब्लॉक का विकल्प

यदि आप एसएमएस के माध्यम से अपना मोबाइल ब्लॉक करना चाहते हैं तो इसके लिए किसी दूसरे मोबाइल का इस्तेमाल करना होगा। मैसेज बॉक्स में जाकर KYM <15 digit IMEI number>; टाइप करना होगा। मैसेज 14422 पर सेंड करना होगा। मैसेज सेंड करने पर सीइआइआर पोर्टल के सिस्टम में मोबाइल ब्लॉक करने की रिक्वेस्ट रजिस्टर्ड हो जाएगी। सिस्टम से रिक्वेस्ट वेरीफाइ होने पर मोबाइल ब्लॉक कर दिया जाता है।

सीइआइआर वेबसाइट पर नो योर मोबाइल (केवाइएम) सर्विस भी मिलती है। सर्विस यूजर को अपने मोबाइल डिवाइस की वेलिडिटी जांच करने देती है। बॉक्स और बिल पर आइएमइआइ नंबर लिखा होता है। उपभोक्ता *#06# डायल करके मोबाइल में देख सकते हैं। वेबसाइट के मुताबिक, अगर वह डिवाइस को ब्लैक लिस्टेड, डुप्लीकेट या पहले से इस्तेमाल में दिखाता है तो ऐसा मोबाइल खरीदने से बचना चाहिए।

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“21वीं सदी का यह दशक, भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर के कायाकल्प का दशक है। इस दशक में भारत के लोग, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की वह तस्वीर देखने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना तक मुश्किल थी।” उन्होंने कहा कि घरों, शौचालयों, अस्पतालों, बिजली, पानी, रसोई गैस, शैक्षिक संस्थानों जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचे से लेकर रेलवे, जलमार्ग, वायुमार्ग और सड़कों जैसे भौतिक संपर्क बुनियादी ढांचे तक, ये सभी भारत के तेजी से विकास के मजबूत संकेतक हैं। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में भारत सबसे अच्छा और सबसे बड़ा देख रहा है। प्रधानमंत्री ने देश में परिवहन के इस मोड में समृद्ध इतिहास के बावजूद 2014 से पहले भारत में नदी जलमार्गों का कम इस्तेमाल होने के बारे में चर्चा की। 2014 के बाद, भारत इस प्राचीन शक्ति का उपयोग आधुनिक भारत के निर्माण के लिए कर रहा है। देश की बड़ी नदियों में जलमार्ग विकसित करने के लिए नया कानून और विस्तृत कार्ययोजना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में देश में केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे, अब देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं और लगभग दो दर्जन पहले से ही चालू हैं। इसी तरह, नदी जलमार्ग के माध्यम से कार्गो परिवहन में 8 साल पहले 30 लाख मीट्रिक टन से 3 गुना वृद्धि हुई है। पूर्वी भारत के विकास के विषय पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम पूर्वी भारत को विकसित भारत के लिए एक विकास इंजन बनाने में मदद करेंगे। यह हल्दिया मल्टीमॉडल टर्मिनल को वाराणसी से जोड़ता है और भारत बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और पूर्वोत्तर से भी जुड़ा हुआ है। यह कोलकाता बंदरगाह और बांग्लादेश को भी जोड़ता है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक व्यापार करने में आसानी होगी। कर्मचारियों और कुशल कार्यबल के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि गुवाहाटी में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित किया गया है और जहाजों की मरम्मत के लिए गुवाहाटी में एक नई सुविधा का निर्माण भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “क्रूज शिप हो या कार्गो शिप, ये न सिर्फ ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं, बल्कि इनकी सर्विस से जुड़ा पूरा उद्योग भी नए अवसर पैदा करता है।” एक अध्ययन का हवाला देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि जलमार्ग पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अच्छे हैं और पैसे की भी बचत करते हैं। उन्होंने कहा कि जलमार्गों के संचालन की लागत सड़क मार्गों की तुलना में ढाई गुना कम है और रेलवे की तुलना में एक तिहाई कम है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारत में हजारों किलोमीटर के जलमार्ग नेटवर्क को विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत में जो 125 से ज्यादा नदियां और नदी धाराएं हैं, वे लोगों और सामान के ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल की जा सकती हैं और ये वाटर-वे, भारत में पोर्ट लेड डेवलपमेंट को भी बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने जलमार्गों के एक आधुनिक बहु-मॉडल नेटवर्क के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया और बांग्लादेश और अन्य देशों के साथ साझेदारी के बारे में जानकारी दी, जिसने पूर्वोत्तर में जल संपर्क को मजबूत किया है। संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत में विकासशील जलमार्गों की निरंतर विकास प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा, “एक विकसित भारत के निर्माण के लिए मजबूत कनेक्टिविटी आवश्यक है।” प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की नदी जल शक्ति और देश के व्यापार और पर्यटन को नई ऊंचाई देगी और उन्होंने सभी क्रूज यात्रियों के लिए सुखद यात्रा की कामना की।…
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