जुलाई तक हर 5 में से 1 भारतीय को ही लग पाएगी कोरोना वैक्‍सीन, जानें सरकार का प्‍लान

कोरोना वायरस की कोई वैक्‍सीन अप्रूव होने के बाद भी उसकी पर्याप्‍त डोज उपलब्‍ध कराना सरकारों के लिए बड़ी चुनौती है। भारत में टीकाकरण की योजना बनाई जा रही है और इसमें राज्‍यों से भी इनपुट्स मांगे गए हैं।

कोरोना वायरस की कोई वैक्‍सीन अप्रूव होने के बाद भी उसकी पर्याप्‍त डोज उपलब्‍ध कराना सरकारों के लिए बड़ी चुनौती है। भारत में टीकाकरण की योजना बनाई जा रही है और इसमें राज्‍यों से भी इनपुट्स मांगे गए हैं। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने रविवार को कहा कि सरकार जुलाई 2021 तक 40-50 करोड़ डोज हासिल करने की उम्‍मीद कर रही है। इससे 20-25 करोड़ लोगों को टीका लग जाएगा। यानी सरकारी अनुमान के हिसाब से जुलाई तक केवल 20% आबादी को ही वैक्‍सीन मिल पाएगी। भारत की वर्तमान जनसंख्‍या 130 करोड़ बताई जाती है। भारत में तीन वैक्‍सीन इंसानों पर ट्रायल के 2/3 दौर में हैं। हर्षवर्धन ने कहा कि सरकार वैक्‍सीन के भंडारण और टीकाकरण की प्रक्रिया को लेकर फ्रेमवर्क तैयार करने के अंतिम चरण में है।

कैसे आप तक पहुंचेगी वैक्‍सीन?

हर्षवर्धन ने बताया कि वैक्‍सीन एक बार डेटा वैलिडेट हो जाए तो वैक्‍सीन को अप्रूवल मिलने में देरी का कोइ तुक नहीं है। उन्‍होंने कहा कि नीति आयोग के डॉ वीके पॉल की अगुवाई में एक हाई लेवल कमिटी पूरा प्‍लान बना रही है। किस देश की वैक्‍सीन कब उपलब्‍ध होगी, फार्मा कंपनियों से उनकी वैक्‍सीन के बारे में जानकारी लेना और भारत में पर्याप्‍त टीके मुहैया कराना इस कमिटी का जिम्‍मा होगा। इन्‍वेंट्री और सप्‍लाई चेन मैनेजमेंट के लिए भी इंतजाम किए जा रहे हैं। वैक्‍सीन के कंसाइनमेंट्स की रियल टाइम ट्रैकिंग होगी और ब्‍लैक-मार्केटिंग नहीं होने दी जाएगी। केंद्र सरकार वैक्‍सीन हासिल करने के बाद राज्‍यों को डोज भेजेगी। राज्‍यों को वैक्‍सीन की स्‍टोरेज और टीकाकरण का इंतजाम करना होगा।

किसको पहले लगेगा कोरोना का टीका?

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के अनुसार, वैक्‍सीन 2021 की तीसरी तिमाही से ही उपलब्‍ध हो पाएगी। उन्‍होंने बताया कि राज्‍यों से ऐसे लोगों की लिस्‍ट मांगी गई है जिन्‍हें पहले टीका लगाया जाएगा। हर्षवर्धन ने कहा कि शुरुआती डोज डॉक्‍टर्स, नर्सेज, पैरामेडिक्‍स जैसे हेल्‍थकेयर वर्कर्स को मिलेगी। वैक्‍सीन केंद्र सरकार हासिल करेगी इसलिए राज्‍यों से कहा गया है कि वे वैक्‍सीन निर्माताओं से कोई डील न करें।

भारत में वैक्‍सीन का क्‍या है स्‍टेटस?

देश में तीन वैक्‍सीन ऐसी हैं जो फेज 2/3 ट्रायल से गुजर रही हैं। अभी तक इनके नतीजे उम्‍मीद जगाने वाले रहे हैं। सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने ऑक्‍सफर्ड-अस्‍त्राजेनेका की वैक्‍सीन में पार्टनरशिप की है। कंपनी देश में उनके टीके ‘कोविशील्‍ड’ का ट्रायल कर रही है। इसके अलावा भारत बायोटेक ने Covaxin नाम से टीका तैयार किया है। जायडस कैडिला ने ZyCov-D नाम से वैक्‍सीन बनाई है। भारत उस GAVI गठबंधन का भी हिस्‍सा है जो कम और मध्‍य आय वाले 92 देशों को वैक्‍सीन मुहैया कराने के लिए बनाया गया है।

विदेशी टीकों पर सरकार का क्‍या रुख

सरकार ने कहा है कि विदेश में डेवलप हो रहीं वैक्‍सीन सभी तरह के सेफ्टी पैरामीटर्स पर खरी उतरने के बाद ही भारत आएंगी। हर्षवर्धन ने कहा कि बाहर से आने वाली वैक्‍सीन सुरक्षित और असरदार हैं या नहीं, यह सुनिश्चित करने के बाद ही लोगों को दी जाएगी। उन्‍होंने यह भी साफ किया है रूसी वैक्‍सीन Sputnik V को लेकर सरकार ने कोई फैसला अबतक नहीं किया है।

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प्रधानमंत्री ने देश में परिवहन के इस मोड में समृद्ध इतिहास के बावजूद 2014 से पहले भारत में नदी जलमार्गों का कम इस्तेमाल होने के बारे में चर्चा की। 2014 के बाद, भारत इस प्राचीन शक्ति का उपयोग आधुनिक भारत के निर्माण के लिए कर रहा है। देश की बड़ी नदियों में जलमार्ग विकसित करने के लिए नया कानून और विस्तृत कार्ययोजना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में देश में केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे, अब देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं और लगभग दो दर्जन पहले से ही चालू हैं। इसी तरह, नदी जलमार्ग के माध्यम से कार्गो परिवहन में 8 साल पहले 30 लाख मीट्रिक टन से 3 गुना वृद्धि हुई है। पूर्वी भारत के विकास के विषय पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम पूर्वी भारत को विकसित भारत के लिए एक विकास इंजन बनाने में मदद करेंगे। यह हल्दिया मल्टीमॉडल टर्मिनल को वाराणसी से जोड़ता है और भारत बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और पूर्वोत्तर से भी जुड़ा हुआ है। यह कोलकाता बंदरगाह और बांग्लादेश को भी जोड़ता है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक व्यापार करने में आसानी होगी। कर्मचारियों और कुशल कार्यबल के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि गुवाहाटी में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित किया गया है और जहाजों की मरम्मत के लिए गुवाहाटी में एक नई सुविधा का निर्माण भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “क्रूज शिप हो या कार्गो शिप, ये न सिर्फ ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं, बल्कि इनकी सर्विस से जुड़ा पूरा उद्योग भी नए अवसर पैदा करता है।” एक अध्ययन का हवाला देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि जलमार्ग पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अच्छे हैं और पैसे की भी बचत करते हैं। उन्होंने कहा कि जलमार्गों के संचालन की लागत सड़क मार्गों की तुलना में ढाई गुना कम है और रेलवे की तुलना में एक तिहाई कम है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारत में हजारों किलोमीटर के जलमार्ग नेटवर्क को विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत में जो 125 से ज्यादा नदियां और नदी धाराएं हैं, वे लोगों और सामान के ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल की जा सकती हैं और ये वाटर-वे, भारत में पोर्ट लेड डेवलपमेंट को भी बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने जलमार्गों के एक आधुनिक बहु-मॉडल नेटवर्क के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया और बांग्लादेश और अन्य देशों के साथ साझेदारी के बारे में जानकारी दी, जिसने पूर्वोत्तर में जल संपर्क को मजबूत किया है। संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत में विकासशील जलमार्गों की निरंतर विकास प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा, “एक विकसित भारत के निर्माण के लिए मजबूत कनेक्टिविटी आवश्यक है।” प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की नदी जल शक्ति और देश के व्यापार और पर्यटन को नई ऊंचाई देगी और उन्होंने सभी क्रूज यात्रियों के लिए सुखद यात्रा की कामना की।…
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