मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक अधिकारियों को दिए निर्देश, राजस्थान में नाइट कर्फ़्यू व लॉकडाउन अभी नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि बुधवार को प्रधानमंत्री के साथ सभी राज्यों की बैठक में यह बात सामने आई है कि पूरे देश में संक्रमण फिर से बढ़ रहा है और कई राज्यों में हालात बहुत अधिक चिंताजनक हो गये हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आने वाले दिनों में प्रदेश में संक्रमण की किसी भी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए ऑक्सीजन प्लांट, टेस्टिंग लैब, क्वारेंटाइन और कन्टेमेन्ट जोन जैसी सुविधाओं को दुरूस्त करें और आवश्यकतानुसार उपयोग के लिए तैयार रखें।
Lockdown in Rajasthan

कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा ‘कोविड नियंत्रण के लिए सभी संसाधनों और उपायों को दुरूस्त करें’ मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक अधिकारियों को दिए निर्देश

जयपुर, 18 मार्च। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में कोविड-19 महामारी के संक्रमण की दूसरी लहर के आसन्न खतरे पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सभी स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने पुराने अनुभव के आधार पर महामारी के नियंत्रण के लिए उपलब्ध संसाधनों को उपयोग में लेें। अधिक टेस्टिंग, भीड़ पर नियंत्रण, मास्क पहनने, बार-बार हाथ धोने और सामाजिक दूरी के कोरोना से बचाव के नियमों की पालना में फिर से कड़ाई लाएं। 

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री

श्री गहलोत गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कॉन्फे्रंस के माध्यम कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कह कि एक सप्ताह में ही कोरोना संक्रमण की पॉजिटिविटी दर का 3 गुना बढ़ जाना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बीते एक वर्ष के दौरान कोरोना से लड़ने का हमारा जो साझा अनुभव है, उसके आधार पर हमें प्रदेशवासियों को दूसरी लहर के खतरे से बचाना है। 
इसके लिए विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं और धर्म गुरूओं आदि के साथ विचार-विमर्श करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को साथ लेकर और आपसी समन्वय के साथ ही हम अब तक कोरोना से जंग को सफलतापूर्वक लड़ पाए हैं।   
मुख्यमंत्री ने कहा कि बुधवार को प्रधानमंत्री के साथ सभी राज्यों की बैठक में यह बात सामने आई है कि पूरे देश में संक्रमण फिर से बढ़ रहा है और कई राज्यों में हालात बहुत अधिक चिंताजनक हो गये हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आने वाले दिनों में प्रदेश में संक्रमण की किसी भी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए ऑक्सीजन प्लांट, टेस्टिंग लैब, क्वारेंटाइन और कन्टेमेन्ट जोन जैसी सुविधाओं को दुरूस्त करें और आवश्यकतानुसार उपयोग के लिए तैयार रखें। 
श्री गहलोत ने कहा कि हम सबको को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने में कोई लापरवाही नहीं बरतें। उन्होंने पुलिस, स्थानीय निकाय सहित सम्बन्धित अधिकारियों को मास्क नहीं पहनने तथा बाजारों एवं अन्य सार्वजनिक जगहों पर भीड़-भाड़ की स्थिति उत्पन्न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एक बार फिर से आम लोगों को कोविड से बचाव के उपाय अपनाने के लिए समझाईश के उद्देश्य से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। 
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए हमें हर संभव उपाय करना होगा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कहा कि फिलहाल कुछ ही जिलों में पॉजिटिव केसेज बढ़े हैं और इसी शुरूआती दौर में संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारियों को अन्य विभागों के साथ समन्वय करते हुए हमेशा अलर्ट मोड में रहकर सभी सावधानियों को अपनाते हुए कोरोना के नियत्रंण का बेहतरीन प्रंबधन करना है।  चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सचिव श्री सिद्धार्थ महाजन ने राजस्थान की कोविड संक्रमण की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि बीते दो दिनों में प्रतिदिन 300 से अधिक कोरोना पॉजिटिव मामले आए हैं तथा कुल रोगियों की संख्या 3 हजार से अधिक हो गई है। संतोष की बात यह है कि अधिकतर एक्टिव केसेज होम आइसोलेशन में ही है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने लगातार बढ़ रहे संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए उन्होंने सैम्पलिंग बढ़ाने तथा संदिग्ध रोगियों को आइसोलेट कर उनका तुरन्त इलाज शुरू करने की योजना बनाई है। इसके लिए जिला स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों तक आवश्यक निर्देश दे दिए गये हैं। 
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भण्डारी ने बताया कि संक्रमण की जल्द से जल्द पहचान और तुरन्त इलाज शुरू होने पर ही इसके फैलाव को रोका जा सकता है। कोरोना नियंत्रण के बीते एक वर्ष के अनुभव के आधार पर यह स्पष्ट है कि हम जांच की सुविधाओं का पूरा उपयोग करें और संदिग्ध रोगियों की पहचान कर उन्हें आइसोलेट करें। उन्होंने कहा कि संक्रमण के पहले सप्ताह में आरटीपीसीआर टेस्ट पॉजिटिव नहीं रहता है, ऎसे में संदिग्ध रोगी की सीटी स्कैन जांच से संक्रमण की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। डॉ. भण्डारी ने टीकाकरण अभियान को और तेज करने पर भी जोर दिया।
आरयूएचएस के कुलपति डॉ. राजाबाबू पंवार ने बैठक में कहा कि आम लोगों द्वारा कोविड से बचाव के उपायों को नहीं अपनाने के कारण संक्रमण की स्थिति गंभीर होती जा रही है। प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश में ही मास्क पहनने, हाथ धोने और दूरी बनाए रखने के नियम की अवेहलना की जा रही है, जो इस महामारी के फिर से बढ़ने का कारण बनी है। उन्होंने कहा कि बचाव के उपायों को अनिवार्य रूप से अपनाने के साथ ही अधिक से अधिक लोगों को कोविड का टीका लगाकर इस महामारी के संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। 
इस अवसर पर राज्यमंत्री श्री सुभाष गर्ग, मुख्य सचिव श्री निरंजन आर्य, पुलिस महानिदेशक श्री एमएल लाठर, प्रमुख शासन सचिव गृह श्री अभय कुमार, शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा श्री वैभव गालरिया, शासन सचिव स्वायत्त शासन श्री भवानी सिंह देथा, अतिरिक्त निदेशक सूचना जनसम्पर्क श्री राजपाल यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 
बैठक से सभी संभागीय आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक रेंज, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य और जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा विभिन्न अस्पतालों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी वीडियो कॉन्फं्रेस के माध्यम से शामिल हुए।

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प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत पर्यटन के एक मजबूत चरण में प्रवेश कर रहा है क्योंकि बढ़ते वैश्विक प्रोफाइल के साथ, भारत के बारे में उत्सुकता भी बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसीलिए, पिछले 8 वर्षों में देश में पर्यटन क्षेत्र के विस्तार के लिए कई कदम उठाए गए हैं। आस्था के स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया गया और काशी ऐसे प्रयासों का जीता-जागता उदाहरण है। बेहतर सुविधाओं और काशी विश्वनाथ धाम के कायाकल्प के साथ, काशी में आने वाले भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी बढ़ावा मिला है। काशी में गंगा पार अद्भुत टेंट सिटी से वहां आने और रहने का एक और बड़ा कारण देश-दुनिया के पर्यटकों-श्रद्धालुओं को मिला है। आधुनिकता, आध्यात्मिकता और आस्था से ओतप्रोत न्यू टेंट सिटी पर्यटकों को एक नया अनुभव प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का कार्यक्रम देश में 2014 के बाद की नीतियों, निर्णयों और दिशा-निर्देशों का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री ने कहा, “21वीं सदी का यह दशक, भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर के कायाकल्प का दशक है। इस दशक में भारत के लोग, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की वह तस्वीर देखने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना तक मुश्किल थी।” उन्होंने कहा कि घरों, शौचालयों, अस्पतालों, बिजली, पानी, रसोई गैस, शैक्षिक संस्थानों जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचे से लेकर रेलवे, जलमार्ग, वायुमार्ग और सड़कों जैसे भौतिक संपर्क बुनियादी ढांचे तक, ये सभी भारत के तेजी से विकास के मजबूत संकेतक हैं। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में भारत सबसे अच्छा और सबसे बड़ा देख रहा है। प्रधानमंत्री ने देश में परिवहन के इस मोड में समृद्ध इतिहास के बावजूद 2014 से पहले भारत में नदी जलमार्गों का कम इस्तेमाल होने के बारे में चर्चा की। 2014 के बाद, भारत इस प्राचीन शक्ति का उपयोग आधुनिक भारत के निर्माण के लिए कर रहा है। देश की बड़ी नदियों में जलमार्ग विकसित करने के लिए नया कानून और विस्तृत कार्ययोजना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में देश में केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे, अब देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं और लगभग दो दर्जन पहले से ही चालू हैं। इसी तरह, नदी जलमार्ग के माध्यम से कार्गो परिवहन में 8 साल पहले 30 लाख मीट्रिक टन से 3 गुना वृद्धि हुई है। पूर्वी भारत के विकास के विषय पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम पूर्वी भारत को विकसित भारत के लिए एक विकास इंजन बनाने में मदद करेंगे। यह हल्दिया मल्टीमॉडल टर्मिनल को वाराणसी से जोड़ता है और भारत बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और पूर्वोत्तर से भी जुड़ा हुआ है। यह कोलकाता बंदरगाह और बांग्लादेश को भी जोड़ता है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक व्यापार करने में आसानी होगी। कर्मचारियों और कुशल कार्यबल के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि गुवाहाटी में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित किया गया है और जहाजों की मरम्मत के लिए गुवाहाटी में एक नई सुविधा का निर्माण भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “क्रूज शिप हो या कार्गो शिप, ये न सिर्फ ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं, बल्कि इनकी सर्विस से जुड़ा पूरा उद्योग भी नए अवसर पैदा करता है।” एक अध्ययन का हवाला देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि जलमार्ग पर्यावरण की रक्षा के लिए भी अच्छे हैं और पैसे की भी बचत करते हैं। उन्होंने कहा कि जलमार्गों के संचालन की लागत सड़क मार्गों की तुलना में ढाई गुना कम है और रेलवे की तुलना में एक तिहाई कम है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारत में हजारों किलोमीटर के जलमार्ग नेटवर्क को विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि भारत में जो 125 से ज्यादा नदियां और नदी धाराएं हैं, वे लोगों और सामान के ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल की जा सकती हैं और ये वाटर-वे, भारत में पोर्ट लेड डेवलपमेंट को भी बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने जलमार्गों के एक आधुनिक बहु-मॉडल नेटवर्क के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया और बांग्लादेश और अन्य देशों के साथ साझेदारी के बारे में जानकारी दी, जिसने पूर्वोत्तर में जल संपर्क को मजबूत किया है। संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत में विकासशील जलमार्गों की निरंतर विकास प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा, “एक विकसित भारत के निर्माण के लिए मजबूत कनेक्टिविटी आवश्यक है।” प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की नदी जल शक्ति और देश के व्यापार और पर्यटन को नई ऊंचाई देगी और उन्होंने सभी क्रूज यात्रियों के लिए सुखद यात्रा की कामना की।…
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